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Sunday, August 22, 2021

जीवन में गुरु की आवश्यकता।

जब भी इंसान के मन में सीखने का ख्याल आता है तब उसे गुरु की जरूरत पड़ती है। गुरु...जो उस कार्य में परिपक्व हो और जो उस कार्य को सिखाने के लिए तैयार हो। इंसान अपने बचपन से ही कुछ ना कुछ सीखता ही है। फिर चाहे वो पढ़ाई करना हो या कोई और कार्य हो। दुनियावी सभी कार्य मनुष्य सीखता है। इन सभी कार्यों के लिए इंसान अपनी तरफ से रुपये पैसे भी देता है। ऐसा इसीलिए है क्योंकि मनुष्य जानता है कि जो चीजें वो सीख रहा है उसका महत्व बहुत अधिक है।

इतना सब सीखने बाद भी मनुष्य सबसे अहम चीज़ सीखना भूल जाता है जो आध्यात्मिक जगत की सीख है। जिसमें जीवन जीना और जीवन के लक्ष्य को पूरा करना सिखाया जाता है। इंसान दुनियावी चीजें सीखता है और दुनियावी लक्ष्य को पाने के लिए पूरी मेहनत भी करता है। लेकिन अध्यात्म की तरफ ना तो मनुष्य का ध्यान जाता है और ना ही कभी अपने जीवन के अहम लक्ष्य को जानने का ख्याल आता है। मनुष्य कभी यह नही सोचता कि वह इस संसार में कहां से आया है और यह जीवन समाप्त होने के बाद उसका क्या होगा? मनुष्य बस बचपन खत्म होते ही दुनिया में भागने लगता है। जैसे और सभी लोग भाग रहे थे। दुनिया में दौड़ लगाने वाले लोगों ने कभी रुककर यह नही सोच कि वे अचानक भागने क्यों लगे? इस दुनिया में पैदा होने वाला हर मनुष्य बचपन की मासूमियत खत्म होते ही दुनियावी दौड़ में लग जाता है। फिर चाहे वह पढ़ाई की दौड़ हो या कमाने की या फिर किसी और कार्य की। 


पढ़ाई का सही मकसद होता है सीखना और जानना, लेकिन मनुष्य दूसरे से आगे जाने की दौड़ में सीखना और जानना भूल कर, दूसरों को पीछे करने में लग जाता है। ऐसा कहा जाता है कि शिक्षा मनुष्य को समझ देती है चीजों को और बेहतर तरीके से जानने के लिए। लेकिन मनुष्य की दौड़ में यह बात इंसान नही समझ पाता और अपने अहंकार में चार चांद लगाने की कोशिश में दौड़ता रहता है। जिस दौड़ का अंत मृत्यु है। 
कमाने की दौड़ हो या पढ़ाई में अंकों की दौड़ हो। मनुष्य बस भागता रहता है।

इस भागदौड़ में जीवन जीने की तरफ और अपने जीवन के लक्ष्य को जानने का समय ही नही मिलता। जीवन में इन बातों को जानने के लिए गुरु की आवश्यकता होती है। जो इस दौड़ से रोककर विश्राम करने को कहता है।
गुरु इंसान को जीवन जीने का सलीका सिखाता है और जीवन में सुकून और खुशी लाता है। आध्यात्मिक ज्ञान के जरिये गुरु इंसान के जन्म लेने का लक्ष्य उसे बताता है और उस लक्ष्य को पाने में उसकी सहायता करता है।
जो भी लोग बिना गुरु के जीवन जीते है, उनके जीवन में सुकून की बहुत कमी होती है। ऐसा बहुत हद तक हो सकता है कि दुनियावी उपलब्धि बहुत हो,लेकिन जीवन में सुकून नही होता। जीवन में यदि सुकून ना हो तो डिप्रेशन और दुख का आगमन जीवन में होता है। जिस कारण मनुष्य जीवन को एक कैद खाने की तरह देखता है और अपनी सजा कटता है तथा इससे आजाद होने के गलत तरीके अपनाता है।

इसीलिए इंसान के जीवन में गुरु का होना परम् आवश्यक है। लोग चाहे कितने भी तर्क दे,चाहे कितने भी उदाहरण दें। जिसमें लोगों ने गलत इंसान को गुरु मान लिया। लेकिन यह बात भी तो सच है कि कोशिश करने वालों की हार नही होती। 
आप किसी कार्य में असफल हो जाएं तो क्या आप और ये दुनिया के लोग उस कार्य को छोड़ देते है?
यदि किसी का मित्र धोखेबाज निकल जाए तो क्या लोग मित्रता करना छोड़ देते है?
इसी प्रकार यदि आपको सही गुरु नही मिला तो क्या आप प्रयास करना छोड़ देंगे??

अगर हाँ तो आप सच में बहुत निराशावादी इंसान है और जीवन में बहुत जल्दी हार मानने वाले इंसान है। बुरा मानने की जरूरत नही, बस बात की अहमियत और गहराई समझने की जरूरत है।

चलिये, आप अपने जीवन में गुरु की तलाश कीजिये और गुरु की अहमियत कितनी अधिक है यह आपको वेद ग्रंथों में मिल जाएंगी। इतनी अहम चीज़ को अपने जीवन में ना लाना मूर्खतापूर्ण होगा। जिसके आने से जीवन में सुकून और खुशियां आ जाएं , आध्यात्मिक ज्ञान हो जाएगी। ऐसे गुरु को जीवन में ना लाना बुद्धिमानी नही।

आप गुरु को खोजिये और यदि कोई सवाल,सुझाव या कोई और जानकारी चाहिए हो तो कमेंट कीजिये। 
मैं यही हूँ आपका साथ देने के लिए और अच्छी बातें बताने के लिए।

-योगेन्द्र सिंह
sirfyogi.com

© Yogendra Singh | 2021

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